जिसे हम आलम्बन कहते हैं वह वास्तव में कवि की अपनी अनुभूति का संवेद रूप है। उसके साधारणीकरण का अर्थ है कवि की अनुभूति का साधारणीकरण; जो भट्टनायक और अभिनवगुप्त का प्रतिपाद्य है।
अतएव निष्कर्ष यह निकला कि साधारणीकरण कवि की अपनी अनुभूति का होता है, अर्थात् जब कोई व्यक्ति अपनी अनुभूति को इस प्रकार अभिव्यक्त कर सकता है कि वह सभी के हृदयों में समान अनुभूति जगा सके तो पारिभाषिक शब्दावली में हम कहते हैं कि उसमें साधारणीकरण की शक्ति वर्तमान है।
अनुभूति सभी में होती है, सभी व्यक्ति उसे यत्किंचित् व्यक्त भी कर लेते हैं, परंतु साधारणीकरण करने की शक्ति सब में नहीं होती। इसलिए तो अनुभूति और अभिव्यक्ति के होते हुए भी सब कवि नहीं होते। कवि वह होता है जो अपनी अनुभूति का साधारणीकरण कर सके, दूसरे शब्दों में, "जिसे लोक हृदय की पहचान हो।"
जिसे हम आलम्बन कहते हैं, वह किसकी अनुभूति का संवेद रूप है?
Correct Answer: (b) कवि की
Solution:जिसे हम आलम्बन कहते हैं, वह 'कवि की' अनुभूति का संवेद है।