"नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पगतल में, पीयूष स्त्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल मेंיי
Correct Answer: (a) लज्जा
Solution:"नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पगतल में, पीयूष स्त्रोत सी बहा करो, जीवन के सुन्दर समतल में।" उक्त पंक्ति जयशंकर प्रसाद कृत कामायनी महाकाव्य के लज्जा सर्ग से ली गई है। उर्वशी, झरना, आँसू, लहर, कामायनी आदि इनकी अन्यरचनाएँ हैं।