TGT and PGT (Hindi previous year questions) (Part-XXVII)

Total Questions: 50

1. विशेषण के कितने भेद होते हैं?

Correct Answer: (d) 4
Solution:संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं तथा जिसकी विशेषता बताई जाये,उसे विशेष्य कहते हैं। विशेषण कुल चार प्रकार के होते हैं-

1. गुणवाचक
2. परिमाणवाचक
3. संख्यावाचक
4. सार्वनामिका

2. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द अविकारी है?

Correct Answer: (c) अचानक
Solution:दिये गये शब्दों में 'अचानक' शब्द अविकारी या अव्यय शब्द है। वस्तुतः यह रीतिवाचक क्रिया- विशेषण का उदाहरण है। 'गाय'जातिवाचक संज्ञा, 'तुम्हारा' मध्यम पुरुष सर्वनाम का सम्बन्ध बोधक रूप तथा 'सीता' व्यक्तिवाचक संज्ञा शब्द है।

3. "संसार का सारा कारोबार बच्चों को खिलाने- पिलाने- सुलाने आदि के लिए हो रहा है और इस महत्वपूर्ण कर्त्तव्य में भूल न होने देने का काम माँ नामधारी जीवों को सौपा गया है।" यह किसका कथन है?

Correct Answer: (b) महादेवी वर्मा
Solution:"संसार का सारा कारोबार बच्चों को खिलाने- पिलाने- सुलाने आदि के लिए हो रहा है और इस महत्त्वपूर्ण कर्तव्य में भूल न होने देने का काम माँ नामधारी जीवों को सौंपा गया है।" यह कथन महादेवी वर्मा का है। महादेवी वर्मा छायावाद युग की प्रमुख कवयित्री हैं। इनके प्रमुख रचनाएँ हैं- नीहार, रश्मि, नीरजा, सप्तपर्णा, दीपशिखा आदि।

4. व्याकरण पढ़ने से मनुष्य अच्छा लेखक या वक्तानहीं हो सकता। विचारों की सरलता अथवा असत्यता से भी व्याकरण का कोई सम्बंध नहीं। भाषा में व्याकरण की भूल न होने पर भी विचारों की भूल हो सकती है, रोचकता का अभाव रह सकता है।” यह कथन किसका है?

Correct Answer: (c) पं. कामता प्रसाद गुरु
Solution:"व्याकरण पढ़ने से मनुष्य अच्छा लेखक या वक्ता नहीं हो सकता। विचारों की सरलता अथवा असत्यता से भी व्याकरण का कोई सम्बन्ध नहीं। भाषा में व्याकरण की भूल न होने पर भी विचारों की भूल हो सकती है,

रोचकता का अभाव रह सकता है।" यह कथन प्रसिद्ध वैयाकरण कामता प्रसाद गुरु का है। कामता प्रसाद गुरुने 'हिन्दी व्याकरण' नामक व्याकरण की पुस्तक सन् 1920 ई.में लिखी जो आज भी हिन्दी व्याकरण के लिए मील का पत्थर साबित होती है।

5. मैने सिल पहुँचाई ललित निबन्ध के लेखक कौन हैं?

Correct Answer: (a) डॉ. विद्यानिवास मिश्र
Solution:'मैने सिल पहुँचाई ललित निबन्ध के लेखक डॉ. विद्यानिवास मिश्र हैं। इनके अन्य प्रसिद्ध निबन्ध इस प्रकार हैं-छितवन की छाँह, हल्दी दूब, तुम चन्दन हम पानी, मेरे राम का मुकुट भीग रहा है, परम्परा बन्धन नहीं, कौन तूफुलवा बीन निहारी, फागुन दुईरे दिना, शिरीष की याद आई, गाँधी का करुण रस आदि।

6. 'वाच्य'कितने प्रकार के होते हैं?

Correct Answer: (d) 3
Solution:क्रिया के उस रूपान्तर को वाच्य कहते हैं, जिसके द्वारा इस बात का बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म अथवा भाव इनमें सेड किसकी प्रधानता है। इनमें से किसके अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आए है। इसी के आधार पर वाच्य के तीन प्रकार होते हैं- 1. कर्तृवाच्य 2. कर्मवाच्य 3. भाववाच्या

7. मौलिक रूप से व्यंजना कितने प्रकार की बनती है?

Correct Answer: (c) 3
Solution:मौलिक रूप से व्यंजना के तीन प्रकार होते हैं। शब्द के जिस व्यापार से मुख्य और लक्ष्य अर्थ से भिन्न अर्थ की प्रतीति हो, उसे व्यंजना कहते हैं। इसके प्रकार निम्न हैं-

1. अभिधामूला शाब्दी व्यंजना
2. लक्षणामूला शाब्दी व्यंजना
3. आर्थी व्यंजना

8. 'हम हारी के के हहा, पाइन पारयौ प्यौरु । लेह कहा अजहूँ किये, तेह तरेरयौ त्यौरू (बिहारी)। इस दोहे में कौन सा रस है?

Correct Answer: (c) विप्रलम्भ श्रृंगार
Solution:"हम हारी के कै हहा,पाइन परयौ प्यौरू। लेहु कहा अजहूँ किये, तेह तरे त्यौरू।" बिहारी द्वारा रचित उक्त दोहे में विप्रलम्भ (वियोग) श्रृंगार की निष्पत्ति हुई है। शृंगार रस का स्थायीभाव रति है। इसके दो भेद हैं- संयोग शृंगार, वियोग श्रृंगार। वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है और हास्य रस का स्थायी भाव हास है।

9. 'ढोलकी' शब्द में कौन सा प्रत्यय है?

Correct Answer: (b) ई
Solution:'ढोलकी' शब्द में 'ढोलक' मूल शब्द एवं 'ई' प्रत्यय है 'ई' प्रत्ययान्त अन्य शब्द हैं मालवी, चौथी, चाची, मटकी।

10. दिवस का अवसान समीप था, गगन था कुछ लोहित हो चला, तरु शिखा पर थी अब राजती कमलिनी कुल बल्लभ की प्रभा। इसमें कौन सा अलंकार है?

Correct Answer: (b) स्वाभावोक्ति
Solution:"दिवस का अवसान समीप था,गगन था कुछ लोहित हो चला। तर शिखा पर थी अब राजती कमलिनी कुल बल्लभ की प्रभा।।" इस पंक्ति में 'स्वाभावोक्ति' अलंकार है। काव्य में किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति के स्वाभाविक वर्णन से इस अलंकार की सृष्टि होती है। इस अर्थालंकार की सादगी में चमत्कार रहता है।