जिससे हमें दुख पहुँचता है उस पर यदि हमने क्रोध किया और यह क्रोध हमारे हृदय में बहुत दिनों तक टिका रहा तो वह बैरकहलाता हैं। इसका स्थायी रूप में टिक जाने के कारण क्रोध का वेग और उग्रता तो धीमी पड़ जाती है,
पर लक्ष्य को पीड़ित करने की प्रेरणा बराबर बहुत काल तक हुआ करती है। क्रोध अपना बचाव करते हुए शत्रु को पीड़ित करने की युक्ति आदि सोचने का समय प्रायः नहीं देता, पर वैर उसके लिए बहुत समय देताहै।
पूछिए तो क्रोध और वैर का भेद केवल कालकृत है। दुख पहुँचाने के साथ ही दुख दाता को पीड़ित करने की प्रेरणा करने वाला मनोविकार क्रोध और कुछ काल बीत जाने पर प्रेरणा करने वाला भाव बैर है।
किसी ने आपको गाली दी। यदि आपने उसी समय उसे मार दिया तो आपने क्रोध किया। मान लीजिए कि वह गाली देकर भाग गया और दो महीने बाद आपको कहीं मिला। अब यदि उससे बिना फिर गाली सुने, मिलने के साथ ही उसे मार दिया तो यह आपका बैर निकालना हुआ।
विवरण से स्पष्ट है कि बैर उन प्राणियों में होता है जिनमें धारणा अर्थात भावों के संचय की शक्ति होती है। पशु और बच्चे किसी से वैरनहीं मानते। चूहेऔर बिल्ली के संबंध का 'वैर' नाम आलंकारिक है। आदमी का न आम-अंगूर से कुछ बैर है न भेड़ बकरे से। पशु और बच्चे दोनों क्रोध करते हैं और थोड़ी देर के बाद भूल जाते है।
Correct Answer: (c) आलंकारिक
Solution:गद्यांश के अनुसार चूहे और बिल्ली के संबंध में वैर आलंकारिक शब्द है।